समान नागरिक संहिता संबंधी संक्षिप्त विवरण, विवाह ,तलाक , गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार, दत्तकग्रहण जैसे विषय शामिल
समान नागरिक संहिता संबंधी संक्षिप्त विवरण
विवाह ,तलाक , गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार, दत्तकग्रहण जैसे विषय शामिल
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता का विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया है। इस क़ानून में 5 महत्वपूर्ण विषयों जिनमें विवाह ,तलाक , गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार, दत्तकग्रहण जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा गठित समिति ने लगभग दो वर्षों तक समाज के विभिन्न धर्म, संप्रदाय के प्रतिनिधियों बातचीत कर *43 जनसंवाद और 72 बैठकों को आयोजित किया गया। इसके तहत समिति ने 2 लाख 32 हज़ार से अधिक सुझाव प्राप्त किए जिसमें पोर्टल के करिए लगभग 61 हज़ार डाक द्वारा लगभग 36 हज़ार, दस्ती लगभग 1 लाख 12 हज़ार एवं ई-मेल द्वारा लगभग 24 हज़ार सुझाव प्राप्त किए गए।*
इस समान नागरिक संहिता का मूल आधार समानता और समरसता रखा गया है। यह कानून हिन्दू-मुस्लिम के वाद-विवाद सम्बंधित नहीं है। यह बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक जैसे शब्दों से भी परे कानून है।
ये आयेंगे इस क़ानून के दायरे में
क़ानून की धारा 3 (ड) के तहत यह क़ानून उत्तराखण्ड राज्य के भीतर या बाहर निवास कर रहा भारत का ऐसा नागरिक जो राज्य में कम से कम 01 वर्ष से निवास कर रहा हो। इसके साथ ही केन्द्र/ राज्य सरकार के किसी उपक्रम का स्थायी कर्मचारी, राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अन्तर्गत स्थायी निवासी ठहराये जाने का पात्र हो, केन्द्र या राज्य सरकार की ऐसी योजना का लाभार्थी हो जो राज्य में लागू हो। वो सभी इसके दायरे में आयेंगे।
इसके अतिरिक्त अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को इस क़ानून से बाहर रखा गया है।भारत के संविधान भाग 21 के अन्तर्गत अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को यह संरक्षित है इसलिए अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर संहिता लागू नहीं होगी।
विवाह एवं तलाक़ हेतु प्रावधान
विवाह के लिए पुरुष की 21 वर्ष की आयु और स्त्री ने 18 वर्ष की आयु होना अनिवार्य है।क़ानून की धारा 4 के तहत विवाह के समय न तो वर की कोई जीवित पत्नी हो और न वधू का कोई जीवित पति हो।
विवाह के दोनों पक्ष किसी भी नातेदारी की के भीतर हों या न हों, तब भी वे किसी एक प्रथा के अनुसार विवाह के लिए अनुमन्य होंगे। धारा 5 में विवाह अनुष्ठानों जिसमें सप्तपदी/ निकाह/ पवित्र बंधन/ आनंद कारज को मान्यता दी गई है। धारा 10-11 में विवाह और तलाक को 60 दिनों के भीतर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण करने का प्रावधान रखा गया है। *क़ानून का उल्लंघन करने पर धारा 17-19 में 03 माह का कारावास अथवा 25 हजार का अर्थदण्ड अथवा दोनों का प्रावधान है। पंजीकरण न करने की स्थिति में 10 हजार रुपये तक का अर्थदण्ड व उपनिबंधक की निष्क्रियता के लिये 25 हजार रुपये तक का अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है।
उत्तराधिकार हेतु प्रावधान
समान नागरिक संहिता की धारा 49-53 के तहत उत्तराधिकारियों को जो अनुसूचि 2 के श्रेणी-1 में निर्दिष्ट नातेदार हैं प्राथमिकता दी जायेगी। यदि श्रेणी-1 का कोई उत्तराधिकारी ना हो तो अनुसूचि 2 के श्रेणी-2 में निर्दिष्ट नातेदारों को प्राथमिकता दी जायेगी। यदि उल्लेखित दोनों श्रेणीयों का कोई भी उत्तराधिकारी ना हो तो अन्य नातेदार सम्मिलित किये जायेंगे। इसके साथ ही पुत्र और पुत्रियों को समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के प्राविधानों के आधार पर उपरोक्त भाग सम्मिलित किया गया है। अविभाजित हिन्दु परिवारों (HUF) के लिये हिन्दु उत्तराधिकार अधि. 1956 के प्राविधानों को स्पष्ट करते हुए इस संहिता में सम्मिलित किया गया है।
लीव इन रिलेशन के संबंध में प्रावधान
सहवासी सम्बन्ध का धारा 378-389 में प्रावधान किया गया है। 378, 384 : सहवासियों द्वारा सम्बन्ध रखने/ सम्बन्ध समाप्ती की जानकारी निबंधक के समक्ष अनिवार्य होगा। धारा 379 के तहत लीव इन रिलेशन सम्बन्ध से जनित कोई भी बच्चा वैध होगा। सहवासियों द्वारा निबंधक के समक्ष प्रस्तुत जानकारी निबंधक द्वारा स्थानीय थाना प्रभारी को सूचित किया जायेगा। यदि सहवासियों में से कोई भी 21 वर्ष से कम आयु का हो तो ऐसे सहवासी के माता-पिता/ अभिभावकों को निबंधक द्वारा सूचित किया जायेगा। सहवासियों द्वारा प्रस्तुत कथन असत्य या संदिग्ध प्रतीत होने पर निबंधक द्वारा आवश्यक कार्यवाही हेतु स्थानीय थाना प्रभारी को सूचित किया जायेगा।