देहरादून। नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (उत्तराखंड) शिक्षा सचिव (उत्तराखंड) एवं जिलाधिकारी देहरादून को पत्र भेजकर निजी स्कूलों द्वारा सभी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए मनमानी करने पर NCPCR के पत्र का हवाला देते हुए कार्यवाई की मांग करी है। आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण से पूरा विश्व ग्रस्त है। जिससे अपना प्रदेश भी अछूता नही रह गया है। और ऐसे मे अभिभावकों और छात्रों को राहत देने के लिए माननीय उच्च न्यायालय के अलावा विभिन्न विभागों द्वारा फीस सम्बन्धी अध्यादेश पारित हो चुके हैं किंतु निजी स्कूलों की मनमानियों के आगे ये सभी शासनादेश और अध्यादेश बौने साबित हो रहे हैं एक तरफ जहां निजी स्कूलों ने सभी शुल्क मिलाकर ट्यूशन फीस मे तब्दील कर दी है उस से अभिभावक अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं क्योंकि किसी भी अभिभावक को यह समझ नही आ रहा है कि उनके बच्चे की ट्यूशन फीस कितनी है जिसके कारण बहुत से अभिभावक फीस जमा नही कर पा रहे हैं जिसको आधार बना कर निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को नोटिस भेज कर धमकाया जा रहा है कि यदि उन्होंने शीघ्र ही बच्चों की फीस जमा नही करी तो उनके बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से निकाल दिया जाएगा । दूसरी ओर सामान्य दिनों मे 18 मई से 23 मई के बीच ग्रीष्मावकाश पड़ जाती थी किन्तु ऑनलाईन पढ़ाई के चक्कर मे अधिकांश स्कूलों ने आज दिनांक तक भी ग्रीष्मावकाश घोषित नही किया है जिसके कारण बच्चे और अभिभावक अपने को बेहद व्यस्त और असहाय व चिड़चिड़ा महसूस कर रहे हैं ।
इस पर एनएपीएसआर के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान ने मांग करते हुए लिखा है कि चूंकि NCPCR के पत्रांक संख्या NCPCR/2020-21/SF/EDU दिनांकित 21/04/2020 के अनुसार सभी को कोविड 19 , मे विशेषाधिकार प्रदान करते हुए सभी फीस व छात्रों सम्बन्धी मामलों का निस्तारण करना सुनिश्चित किया गया है अतः हमारे इस पत्र का बिंदुवार संज्ञान लेते हुए सर्वप्रथम की निजी स्कूल अभिभावकों को बताएं कि किस मद मे कितनी फीस ली जा रही है (2) सभी निजी स्कूल तुरन्त ग्रीष्मावकाश घोषित करे और (3) फीस प्राप्त न होने की दशा मे छात्रों को क्लॉस या स्कूल से वंचित न करें । कृपया शीघ्र अति शीघ्र अभिभावकों व छात्रों को निजी स्कूलों की मनमानियों से निजात दिलाने का कष्ट करें ।